Ajit yadav
Wednesday, 7 December 2016
Thursday, 28 January 2016
Monday, 22 December 2014
एक बार की बात है, एक पागलखाने के सामने किसी व्यक्ति की कार पंचर हो गयी।
कार को रुकते देखकर पागलखाने की दिवार से झांकते हुए एक पागल ने पूछा:
‘ओ भाई साहब, क्या हुआ?’
उस व्यक्ति ने जवाब दिया: ‘कुछ नही’।
कार को रुकते देखकर पागलखाने की दिवार से झांकते हुए एक पागल ने पूछा:
‘ओ भाई साहब, क्या हुआ?’
उस व्यक्ति ने जवाब दिया: ‘कुछ नही’।
उस व्यक्ति ने कार से उतर कर पहिया बदलने के लिये पंचर वाले पहिये के चारो बोल्ट निकाले ही थे
कि भैंसो का झुंड आ गया।
वह व्यक्ति उठ कर एक तरफ खडा हो गया।
जब भैंसे चली गयी वह व्यक्ति वापिस टायर लगाने के लिये आ गया।
कि भैंसो का झुंड आ गया।
वह व्यक्ति उठ कर एक तरफ खडा हो गया।
जब भैंसे चली गयी वह व्यक्ति वापिस टायर लगाने के लिये आ गया।
परंतु उसने देखा, चारो नट-बोल्ट गायब थे। वह परेशानी से इधर-उधर ढूढने लगा।
वह पागल तब तक वही खडा था। उसने फिर पूछा: ‘भाई साहब क्या हुआ’?
व्यक्ति ने फिर वही जवाब दिया: ‘कुछ नही’।
फिर वह व्यक्ति बोल्ट ढूढने लगा।
व्यक्ति ने फिर वही जवाब दिया: ‘कुछ नही’।
फिर वह व्यक्ति बोल्ट ढूढने लगा।
थोडी देर बाद पागल ने फिर पूछा:
‘अरे ,बताइये ना, क्या हुआ, मैं आपकी कुछ मदद करूँ क्या’?
‘अरे ,बताइये ना, क्या हुआ, मैं आपकी कुछ मदद करूँ क्या’?
उस व्यक्ति ने सोचा, ये पागल ऐसे ही दिमागखायेगा,
वह गुस्से से बोला – ‘तुम जाओ भाई,
मेरी कार के चारो बोल्ट गुम हो गये है, परेशान मत करो’।
वह गुस्से से बोला – ‘तुम जाओ भाई,
मेरी कार के चारो बोल्ट गुम हो गये है, परेशान मत करो’।
पागल बोला: अरे, दिमाग नही है क्या?
पागलो की तरह परेशान क्यो हो रहे हो, बाकी के तीन पहियो से एक-एक बोल्ट
निकाल कर इस पहिये मे भी तीन बोल्ट लगा लो।
आगे जाकर दुकान से चार बोल्ट खरीद कर चारो मे एक-एक लगा देना।
उस व्यक्ति ने उस पागल से कहा:
अरे वाह क्या आईडिया दिया है!
पर तुम्हें पागल खाने में क्यों रखा है, तुम तो काफी अक्लमंद लगते हो
पागलो की तरह परेशान क्यो हो रहे हो, बाकी के तीन पहियो से एक-एक बोल्ट
निकाल कर इस पहिये मे भी तीन बोल्ट लगा लो।
आगे जाकर दुकान से चार बोल्ट खरीद कर चारो मे एक-एक लगा देना।
उस व्यक्ति ने उस पागल से कहा:
अरे वाह क्या आईडिया दिया है!
पर तुम्हें पागल खाने में क्यों रखा है, तुम तो काफी अक्लमंद लगते हो
तब पागल बोला: भाई साहब में पागल हूँ
*CHUTIYA* नही|
*CHUTIYA* नही|
Sunday, 23 November 2014
"एक रिश्ता बेनाम सा" by Bhagwant Anmol
आपकी यह उपन्यास मुझे प्राप्त हो गयी लेकिन आपके मेरे रिश्ते का एक नाम है
मित्रता का मित्रता का रिश्ता सच और ईमानदारी से हो तो कोहिनूर से ज्यादा
चमक बिखरती है सूरज के ताप की तरह गर्माहट बनी रहती है आप अनमोल हो वास्तव
में आप अनमोल हो जो इस फेसबुक की मित्रता को आपने अपने अहम से टकराने नहीं
दिया आपकी सहजता ही मेरे लिये धरोहर है।
आप में से कोई सोच सकता है सौरभ किसकी तारीफ कर रहा है कौन है यह तो आप सभी को बता देता हूं कि आप नवयुवक लेखक भगवंत अनमोल हैं इसके पहले मैने आपको सिर्फ फेसबुक पर पढा था धीरे धीरे हमारी दोस्ती हुई और मैं आपकी किताब एक रिश्ता बेनाम सा पढने का इच्छुक था ।अनमोल जी ने मुझे साईट अड्रेस दिया लेकिन बाद में मैने ही अपना एड्रेस दिया और भगवंत जी ने बुक मेरे नाम से पेय एट डिलिवरी आर्डर कर दी लेकिन साईट में समस्या होने की वजह से किताब प्राप्त नहीं हुई अंततः भगवंत जी ने आनलाइन पेड करके यह किताब मुझ तक पहुचाई भगवंत जी कहने लगे कि इसे मेरी तरफ से उपहार समझें बेशक मैं उपहार ही समझता हूं लेकिन किताब की कीमत देने को मैने साफ बोल दिया कि ज्ञान बिना गुरूदक्षिणा के नहीं लूंगा क्यूंकि आपकी यह किताब पढकर मैं कुछ ना कुछ अवश्य सीखूंगा।
आप में से कोई सोच सकता है सौरभ किसकी तारीफ कर रहा है कौन है यह तो आप सभी को बता देता हूं कि आप नवयुवक लेखक भगवंत अनमोल हैं इसके पहले मैने आपको सिर्फ फेसबुक पर पढा था धीरे धीरे हमारी दोस्ती हुई और मैं आपकी किताब एक रिश्ता बेनाम सा पढने का इच्छुक था ।अनमोल जी ने मुझे साईट अड्रेस दिया लेकिन बाद में मैने ही अपना एड्रेस दिया और भगवंत जी ने बुक मेरे नाम से पेय एट डिलिवरी आर्डर कर दी लेकिन साईट में समस्या होने की वजह से किताब प्राप्त नहीं हुई अंततः भगवंत जी ने आनलाइन पेड करके यह किताब मुझ तक पहुचाई भगवंत जी कहने लगे कि इसे मेरी तरफ से उपहार समझें बेशक मैं उपहार ही समझता हूं लेकिन किताब की कीमत देने को मैने साफ बोल दिया कि ज्ञान बिना गुरूदक्षिणा के नहीं लूंगा क्यूंकि आपकी यह किताब पढकर मैं कुछ ना कुछ अवश्य सीखूंगा।
लेकिन भगवंत जी आप भी ना नवयुवक हो और अजीब इंसान हो क्या कहते हैं सौरभ
भाई पहले आप किताब पढ लो अगर किताब पढकर मजा आये तब बताना उसके बाद ही मैं
आपको अपना एकाउंट नंबर दूंगा अगर आपकी इतनी जिद है तब लगा दीजिएगा नहीं तो
आप मेरे मित्र हो 300 रूपये की यह किताब सदैव मेरी तरफ से उपहार समझना।
लेकिन मुझे मजा आये या ना आये मैं इस किताब का मूल्य अवश्य दूंगा माफी चाहता हूं भगवंत जी थोड़ा तनाव में था कुछ एक पृष्ठ पढें पढते ही वास्तव में आनंद आ रहा है आप जैसे नवयुवक लेखक को सत सत नमन करता हूं क्यूंकि मैं जिससे सीखता हूं मैं उसे शीश नवाना जानता हूं मैं अभी तक आप से व्यक्तिगत रूप से मिला नहीं और आपने अपने व्यवसाय के बारे में क्यूं नहीं सोचा क्यूंकि इसमें आपका कोई जोर नहीं होगा प्रकाशक वर्तमान समय में ज्यादा महत्वपूर्ण है मैने तो यह भी सुना है कि हिंदी के लेखक ज्यादा पैसा या रायल्टी इनकम इतनी नहीं पाते की वह किसी जानपहचान वाले भाई बहन को उपहार दे सकें भगवंत जी एक ही बिनती है उदार दिल वाले मत बनिये .......
"ना को हा में बदलना सीखें
ईमानदारी से बेचना सीखें और सफल बनें"
भगवंत जी बेशक आपकी कोई बात नहीं लेकिन प्रकाशक भी है लेकिन मुझे बहुत खुशी है आप एक अच्छे नवयुवक लेखक हो साथ ही मित्रता निभाने का उदार हृदय आप में विद्यमान है मैं आपको सलाह देने के योग्य नहीं आप मित्रता अवश्य निभाईये पर मैने देखा है लोग ऐसा नहीं करते जैसे आप मुझसे हर बार कहते हैं उपहार समझो पैसा नहीं चाहिए जब मैं जिद करता हूं तब आप कहते हो जब पढकर मजा आये तब पैसा देना अगर आपकी यही जिद है भगवंत जी तो मुझे मजा आ रही पूरी किताब पढकर समीक्षा अवश्य लिखूंगा।
लेकिन मुझे मजा आये या ना आये मैं इस किताब का मूल्य अवश्य दूंगा माफी चाहता हूं भगवंत जी थोड़ा तनाव में था कुछ एक पृष्ठ पढें पढते ही वास्तव में आनंद आ रहा है आप जैसे नवयुवक लेखक को सत सत नमन करता हूं क्यूंकि मैं जिससे सीखता हूं मैं उसे शीश नवाना जानता हूं मैं अभी तक आप से व्यक्तिगत रूप से मिला नहीं और आपने अपने व्यवसाय के बारे में क्यूं नहीं सोचा क्यूंकि इसमें आपका कोई जोर नहीं होगा प्रकाशक वर्तमान समय में ज्यादा महत्वपूर्ण है मैने तो यह भी सुना है कि हिंदी के लेखक ज्यादा पैसा या रायल्टी इनकम इतनी नहीं पाते की वह किसी जानपहचान वाले भाई बहन को उपहार दे सकें भगवंत जी एक ही बिनती है उदार दिल वाले मत बनिये .......
"ना को हा में बदलना सीखें
ईमानदारी से बेचना सीखें और सफल बनें"
भगवंत जी बेशक आपकी कोई बात नहीं लेकिन प्रकाशक भी है लेकिन मुझे बहुत खुशी है आप एक अच्छे नवयुवक लेखक हो साथ ही मित्रता निभाने का उदार हृदय आप में विद्यमान है मैं आपको सलाह देने के योग्य नहीं आप मित्रता अवश्य निभाईये पर मैने देखा है लोग ऐसा नहीं करते जैसे आप मुझसे हर बार कहते हैं उपहार समझो पैसा नहीं चाहिए जब मैं जिद करता हूं तब आप कहते हो जब पढकर मजा आये तब पैसा देना अगर आपकी यही जिद है भगवंत जी तो मुझे मजा आ रही पूरी किताब पढकर समीक्षा अवश्य लिखूंगा।
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